बीरबल
बीरबल जो काफी चतुर,होशियार, वहुप्रतिभाशाली और हर कार्य में निपुण थे इसी कारण राजा अकबर को बीरबल अधिक प्रिय थे। बीरबल दरबार की शोभा तो बढ़ाते उसके अलावा दरबार में न्याय की गुहार करने वालों को उचित न्याय दिलाने में मंत्रियों के सहायक बनते ।
राजा अकबर
राजा अकबर को बीरबल अत्यंत प्रिय थे । जब कभी भी राजा अकबर को कोई समस्या या चिंता होती तो अपनी समस्या और चिंता को लेकर बीरबल के पास पहुंचते और बीरबल द्वारा बताई सलाह पर अमल करते जो सही होतीं। ऐसे कई कारण थे ।जब राजा अकबर को बीरबल की सलाह लेनी पड़ी।
कहानी
एक बार की बात है जब बहुत अधिक सर्दी पड़ रही थी राजा अकबर ने ऐलान करवाया की जो भी महल के नजदीक वाली सरोवर के ठंडे पानी में रात भर खड़े रहेगा तो उसे इनाम में सौ सोने की मुद्राएं मिलेंगी ।ऐसा सुनकर नगर वासी आपस में बातचीत करने लगे की ऐसे जाड़े के दिनों मे जब कोहरा भी पढ रहा है कौन पूरी रात के लिए सरोवर की ठंडे पानी में खड़ा रह सकता है जिसे अपनी जान प्यारी ना हो वही ऐसा कर सकता है।
राजा अकबर के महल के पास ही एक बेहद गरीब परिवार रहता था परिवार के मालिक ने जब यह ऐलान सुना तो उसने सोचा कि मुझे इस वक्त रूपए पैसे की बहुत सख्त जरूरत है इसलिए मैं उस सरोवर के ठंडे पानी में रात भर खड़े रहूंगा यह सोचकर वह राजा अकबर के महल की तरफ चल दिया।
राजा के मंत्रियों ने उस गरीब को वह सरोवर दिखाई और उसमें खड़े होने के लिए कहने लगे और बताया कि अगर रात में ठंड के कारण तुम्हारी मृत्यु हो जाए तो उसका दोषी कोई नहीं माना जाएगा गरीब आदमी ने कहा कि ठीक है।
सरोवर का पानी बहुत ठंडा था पर गरीब आदमी को पैसे की सख्त जरूरत थी इसलिए वो रात भर उस पानी में खड़ा रहा और जब सुबह हुई तब निकाल कर आया।
राजा अकबर का दरबार लगा हुआ था और उस गरीब आदमी को शर्त के अनुसार 100 सोने की मोहरे दी जानी थी राजा ने पूछा क्या तुम्हें रात को अंधेरे में डर और ठंड नहीं लगी और कैसे तुमने पूरी रात पानी में खड़े होकर गुजारी इस पर उस गरीब ने कहा की राजाजी सरोवर से मुझे दूर एक घर में दिया जलता दिख रहा था उसकी रौशनी को देखते हुए मैंने पूरी रत ठंडे पानी में खड़े होकर गुजार दी।
अकबर ने कहा तुमने शर्त पूरे नियम से नहीं की इसलिए तुम्हें इनाम नहीं दिया जाएगा और शर्त तोड़ने की वजह से तुम्हें 100 कौड़े मारे जाएंगे।
बीरबल को यह बात उचित नहीं लगी और बीरबल चुपचाप से दरबार छोड़कर चले गए।
अगले दिन राजा अकबर का दरबार लगा सारे मंत्री आ चुके थे और राजा अकबर भी गद्दी पर बैठे थे परंतु बीरबल कहीं नहीं दिखाई दे रहे थे राजा अकबर ने मंत्री से पूछा की बीरबल क्यों नहीं आए। इस पर मंत्रीने कहा की बीरबल अपने घर पर खिचड़ी बना रहे हैं और उन्होंने संदेश भिजवाया है जैसे ही खिचड़ी बन जाएगी वह दरबार में आ जाएंगे।
अगले दिन फिर दरबार लगा परंतु बीरबल नहीं आए राजा अकबर ने फिर पूछा और फिर वही जवाब मिला की खिचड़ी बनते ही बीरबल आ जाएंगे ऐसा कुछ दिन चला पर बीरबल नहीं आए ।अंत में राजा अकबर ने कहा में स्वयं जाऊंगा बीरबल के घर और देखूंगा कि बीरबल कौन सी खिचड़ी पका रहे हैं जो कि इतने दिनों से नहीं बनी यह कहकर वह बीरबल के घर चल दिए।
बीरबल अपने घर के पिछवाड़े में बैठे हुए थे और चूल्हे में आग लगने से बहुत धुआं ही धुआ था ।अकबर ने देखा के नीचे चूल्हे में आग लगी थी और दूर पेड़ पर हांडी लटकी हुई थी जिसमें खिचड़ी पकने रखी हुई थी।
यह देखकर अकबर को पहले खूब हंसी आई और फिर कहा बीरबल इस तरह खिचड़ी कब तक बनेगी क्या इतनी दूर से हांडी गरम हो जाएगी तो इस पर बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा क्यों नहीं राजा जी जब सरोवर में खड़े होकर दूर से जलते दिये कि लौ देखकर उस गरीब को गर्माहट मिल सकती है तो मेरी खिचड़ी भी पक जाएगी ।राजा अकबर सारी बात समझ गए और चुपचाप अपने महल लौट गए।
अगले दिन दरबार में उस गरीब व्यक्ति को बुलाया गया और उससे माफी मांगी गई और इनाम की सौ सोने की मोहरें भी दी गई।
इस तरह बीरबल मैं एक उचित न्याय किया और उस गरीब को उसका इनाम भी दिलवाया ।